मंगलवार, 7 अप्रैल 2009

सुबहें (शुन्तारो तानिकावा से माफ़ी के साथ)

सुबह होती है
क्योंकि बच्चे हंसते हैं.
बच्चे हंसते हैं
क्योंकि धूप में चमकते हैं
रंगीन गुब्बारे.
गुब्बारे चमकते हैं
क्योंकि ताज़ा बन रही चाय
लगाती है भाप का लोशन उनपर.

ताज़ा बनती है चाय
क्योंकि हर सुबह ठीक ९:३० पर छूटती है फास्ट लोकल
ताकि चलता रहे काम

होती रहें सुबहें
और हंसते रहे
गुब्बारों को देख
ललचाते बच्चे

क्योंकि जब हंसते हैं बच्चे
सुबह होती हैं
सबसे ख़ूबसूरत

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