बुधवार, 25 मार्च 2009

अगर मुझे मारना चाहते हो तो

बुझा दो
जो जलता है.
रोशनी के लिए
ढूँढो दिए के नीचे

घोंट दो गला उस आवाज़ का
जो तुम्हारी आवाज़ से नहीं मिलती
और मिटा दो वो सबकुछ
जिससे देखने के लिए तुम्हे आँखें उधार लेनी पड़ती हैं

सच हमेशा एहसान की तरह होता है
जो दूसरे पर किया जाता है
और इसलिए देने वाला लेने वाले से बड़ा हो जाता है

मुझे मारो मगर सच से
वरना तुम्हारी झूठ की गोली को फाड़ कर
तुम्हारी आत्मा को नंगा करने का
माद्दा अभी भी है मेरे पास

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