बुधवार, 25 मार्च 2009

ज़िन्दगी

छन्नू बाबा की कजरी
पान वाली खराशी मिठास

जो सत्रियानी का गिटार
अभिव्यक्ति के आवेग की सुरीली-बेसुरी चीख

बम्बई का ट्रैफिक
सुबह ७:३० बजे और ९:३० बजे

बनाने का सुख
छोड़ने के दुःख

चूमना किसी सोते हुए बच्चे को
और संतोष सटीक सुर का

समंदर किनारे शाम की हवा
तीन दिन की लगातार बारिश

अल-सुबह की अधूरी नींद
पूरी रात का अधूरा मंथन

बेवजह की कविता
वजह का असमंजस

हवा जैसा पिता का प्यार
फटकार जैसी माँ की फ़िक्र

जैसे राखी पर मिलना
धागे के साथ बहिन की चिट्ठी
और कटना बिजली का
उससे पढ़ने से पहले

एक गुलाब है
कांटो वाला
जो रंग बदलता हैं
धूप के साथ

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